
बेंगलुरु। सरजापुर रोड के पास स्थित हलनायकनहल्ली झील में गणेश विसर्जन के बाद जमा हुए कचरे को हटाने के लिए रविवार को बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। युवा वॉलंटियर्स की एक टीम ने झील और उसके आसपास से कुल 720 किलोग्राम कचरा हटाया। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी POP से बनी गणेश मूर्तियों की थी।
इस सफाई अभियान का आयोजन ‘वी आर आरंभ’ नाम के जीरो-वेस्ट स्टार्टअप ने पर्यावरण संस्था ‘टीम सोशल स्पॉटलाइट’ और अन्य स्थानीय समूहों के सहयोग से किया। अभियान में 50 से ज्यादा वॉलंटियर्स शामिल हुए। टीम ने कई घंटों तक झील के किनारों और पानी से मूर्तियों के अवशेष, सजावटी सामग्री और अन्य त्योहार से जुड़ा कचरा बाहर निकाला।
आयोजकों के मुताबिक कुल 720 किलोग्राम कचरे में से करीब 500 किलोग्राम सिर्फ POP की मूर्तियों और उनके टूटे हुए हिस्सों का था। बाकी कचरे में फूल-मालाएं, सजावट का सामान, कपड़े, प्लास्टिक और अन्य पूजा सामग्री शामिल थी।
झील में जमा भारी मात्रा में कचरे को हटाना आसान नहीं था। इसके लिए वॉलंटियर्स ने अर्थमूवर्स, विशेष जालियों और हाथ से इस्तेमाल किए जाने वाले औजारों की मदद ली। कई जगह मूर्तियों के बड़े हिस्से पानी और कीचड़ में धंसे हुए थे, जिन्हें निकालने में काफी मेहनत करनी पड़ी।
टीम के सदस्यों ने पहले झील के आसपास फैले कचरे को अलग-अलग हिस्सों में इकट्ठा किया। इसके बाद पानी के भीतर मौजूद मूर्तियों और अन्य सामग्री को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ। बड़े और भारी टुकड़ों को हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि छोटे टुकड़े वॉलंटियर्स ने हाथों और जालियों की मदद से निकाले।
सफाई अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती POP से बनी मूर्तियां रहीं। पानी में लंबे समय तक रहने के बाद भी प्लास्टर ऑफ पेरिस पूरी तरह घुलता नहीं है। इसकी वजह से मूर्तियों के बड़े-बड़े हिस्से झील में पड़े रहते हैं और धीरे-धीरे टूटकर तल में जमा हो जाते हैं।
पर्यावरण से जुड़े समूह लंबे समय से POP मूर्तियों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताते रहे हैं। इनके साथ इस्तेमाल होने वाले रंग, सजावट और अन्य सामग्री भी पानी की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। इसी कारण मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों को बढ़ावा देने की मांग लगातार उठती रही है।
हलनायकनहल्ली झील में चले इस अभियान का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं था, बल्कि लोगों को यह संदेश देना भी था कि त्योहारों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना जरूरी है। वॉलंटियर्स ने कहा कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जलस्रोतों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
टीम का कहना है कि विसर्जन के बाद यदि कचरे को तुरंत नहीं हटाया जाए तो वह लंबे समय तक झील में पड़ा रह सकता है। इससे पानी की गुणवत्ता, जलीय जीवों और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
अभियान में शामिल वॉलंटियर्स ने झील के किनारे पड़े कई छोटे-बड़े अवशेष भी हटाए। मूर्तियों के साथ आए कपड़े, फूल-मालाएं और सजावटी वस्तुएं कई जगह पानी की सतह और किनारे पर जमा थीं। इन्हें अलग-अलग करके उठाया गया ताकि बाद में उचित तरीके से निपटान किया जा सके।
जीरो-वेस्ट मॉडल पर काम करने वाली संस्था ‘वी आर आरंभ’ का जोर कचरे को केवल इकट्ठा करने के बजाय उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और सही तरीके से निपटाने पर रहा। साफ किए गए कचरे को भी उसकी प्रकृति के अनुसार अलग किया गया।
पर्यावरण संस्था ‘टीम सोशल स्पॉटलाइट’ और स्थानीय समूहों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी की। बड़ी संख्या में युवाओं ने स्वेच्छा से सफाई में हिस्सा लिया। कुछ वॉलंटियर्स ने पानी में उतरकर कचरा निकाला, जबकि अन्य लोगों ने किनारे पर उसे एकत्र करने और छांटने का काम किया।
50 से अधिक वॉलंटियर्स की मौजूदगी के बावजूद 720 किलोग्राम कचरा हटाना चुनौतीपूर्ण रहा। इसका एक कारण यह था कि बड़ी मात्रा में POP सामग्री भारी थी और पानी तथा कीचड़ के कारण उसका वजन और बढ़ गया था।
अभियान के दौरान सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया। पानी में उतरने वाले वॉलंटियर्स को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए और भारी सामग्री निकालने के लिए मशीनों का सहारा लिया गया। इससे कम समय में ज्यादा कचरा हटाने में मदद मिली।
स्थानीय लोगों ने भी सफाई अभियान को लेकर सहयोग दिया। झील के आसपास रहने वाले निवासियों के लिए विसर्जन के बाद जमा कचरा चिंता का कारण बन गया था। सफाई के बाद झील के किनारों की स्थिति पहले से बेहतर दिखाई दी।
आयोजकों का कहना है कि ऐसी सफाई केवल एक दिन का काम नहीं हो सकती। यदि भविष्य में भी बड़े पैमाने पर POP मूर्तियों का इस्तेमाल और विसर्जन होता रहा तो हर साल इसी तरह कचरे की समस्या सामने आएगी। इसलिए समस्या के स्थायी समाधान के लिए लोगों की आदतों में बदलाव जरूरी है।
उन्होंने पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों, प्राकृतिक रंगों और सीमित सजावट को अपनाने पर जोर दिया। इसके अलावा सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर अलग से संग्रह और सफाई व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत भी बताई गई।
जलस्रोतों को स्वच्छ रखने में प्रशासन के साथ स्थानीय समुदायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। छोटे-छोटे समूहों की भागीदारी से झीलों और तालाबों की सफाई का काम अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
हलनायकनहल्ली झील में चलाए गए अभियान ने गणेश उत्सव के बाद पैदा होने वाले कचरे की मात्रा को भी सामने रखा है। अकेले एक सफाई अभियान में 500 किलोग्राम से ज्यादा POP सामग्री और कुल 720 किलोग्राम कचरा निकलना यह दिखाता है कि विसर्जन के बाद पर्यावरण प्रबंधन कितना जरूरी है।
फिलहाल वॉलंटियर्स ने झील से बड़ी मात्रा में कचरा हटाकर क्षेत्र को साफ करने में मदद की है। अभियान से जुड़े समूहों ने कहा कि आगे भी झीलों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि लोगों में जिम्मेदार उत्सव और स्वच्छ जलस्रोतों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।





